ब्यूरो रिपोर्ट, 10 दिसंबर 2017। 69 साल पहले आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र ( यूनाइटेड नेशन्स ) की जनरल एसेम्बली ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस ऐतिहासिक कार्य के बाद ही एसेम्बली ने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे 10 दिसंबर 1948 को हुई इस घोषणा का प्रचार […]

ब्यूरो रिपोर्ट, 10 दिसंबर 2017। 69 साल पहले आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र ( यूनाइटेड नेशन्स ) की जनरल एसेम्बली ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस ऐतिहासिक कार्य के बाद ही एसेम्बली ने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे 10 दिसंबर 1948 को हुई इस घोषणा का प्रचार करें और देशों या प्रदेशों की राजनीतिक स्थिति पर आधारित भेदभाव का विचार किए बिना विशेषतः स्कूलों और अन्य शिक्षा संस्थाओं में इसके प्रचार, प्रदर्शन और व्याख्या का प्रबंध करें। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार घोषणा पत्र का मुख्य विषय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगारी, आवास, संस्कृति, खाद्यान्न व मनोरंजन से जुड़ी मानव की बुनयादी मांगों से संबंधित है।

आईये जानते हैं क्या है मानव अधिकार ?

क्या हैंं मानव अधिकार?- मानव के जन्म लेने के साथ ही उसके अस्तित्व को बनाये रखने के लिए कुछ अधिकार उसको स्वतः मिल जाते हैं और वह उनका जन्मसिद्ध अधिकार होता है। इस दुनिया में प्रत्येक मनुष्य के लिए अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिकार एक मनुष्य होने के नाते प्राप्त हो जाता है। चाहे वह अपने हक के लिए बोलना भी जानता हो या नहीं। एक नवजात शिशु को दूध पाने का अधिकार होता है और तब वह बोलना भी नहीं जानता। लेकिन माँ उसको स्वयं देती है और अगर नहीं देती है तो उसके घरवाले, डॉक्टर सभी उसको इसके लिए कहते हैं, क्योंकि ये उस बच्चे का हक है और ये उसे मिलना ही चाहिए। एक बच्चे के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए ये जरूरत सबसे अहम् होती है। लेकिन उसके बड़े होने के साथ-साथ उसके अधिकार भी बढ़ने लगते हैं। बच्चे के पढ़ने-लिखने और अपनी परवरिश आदि के लिए उसको समुचित सुविधाएँ और वातावरण देना भी जरूरी अधिकारों में आता है। उन्हें आत्म-सम्मान के साथ जीने के लिए, अपने विकास के लिए और आगे बढ़ने के लिए कुछ हालात ऐसे चाहिए, जिससे की उनके रास्ते में कोई व्यवधान न आये। मानवाधिकार की सुरक्षा के बिना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी खोखली है मानवाधिकार की लड़ाई हम सभी की लड़ाई है। विश्वभर में नस्ल, धर्म, जाति के नाम मानव द्वारा मानव का शोषण हो रहा है। अत्याचार एवम जुल्म के पहाड़ तोड़े जा रहे हैं।


मानव अधिकार की अंतर्राष्ट्रीय सार्वभौमिकता – 10 दिसंबर 1948 को यूनाइटेड नेशन्स की जनरल एसेम्बली ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस ऐतिहासिक कार्य के बाद ही एसेम्बली ने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे इस घोषणा का प्रचार करें और देशों या प्रदेशों की राजनीतिक स्थिति पर आधारित भेदभाव का विचार किए बिना विशेषतः स्कूलों और अन्य शिक्षा संस्थाओं में इसके प्रचार, प्रदर्शन और व्याख्या का प्रबंध करें। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार घोषणा पत्र का मुख्य विषय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगारी, आवास, संस्कृति, खाद्यान्न व मनोरंजन से जुड़ी मानव की बुनयादी मांगों से संबंधित है। विश्व के बहुत से क्षेत्र गरीबी से पीड़ित है, जो बड़ी संख्या वाले लोगों के प्रति बुनियादी मानवाधिकार प्राप्त करने की सबसे बड़ी बाधा है। उन क्षेत्रों में बच्चे, वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं के बुनियादी हितों को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इस के अलावा नस्लवाद व नस्लवाद भेद मानवाधिकार कार्य के विकास को बड़ी चुनौती दे रहा है।

भारतीय संविधान में मानव अधिकारः- मानव अधिकार से तात्पर्य उन सभी अधिकारों से है जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिश्ठा से जुड़े हुए हैं। यह अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से वर्णित किये गये हैं और न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है । इसके अलावा ऐसे अधिकार जो अन्तर्राश्ट्रीय समझौते के फलस्वरूप संयुक्त राश्ट्र की महासभा द्वारा स्वीकार किये गये है और देष के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है, को मानव अधिकार माना जाता है । संविधान के अनुच्छेद 14,15,16,17,19,20,21,23,24,39,43,45 देश में मानवाधिकारों की रक्षा करने के सुनिश्चित हैं। ‘भारतीय संविधान’ इस अधिकार की न सिर्फ़ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले को अदालत सजा देती है। भारत में 28 सितंबर, 1993 से मानव अधिकार क़ानून अमल में आया। 12 अक्टूबर, 1993 में सरकार ने ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ का गठन किया। इसी तरह प्रदेशों में राज्य मानव अधिकार आयोग का समय-समय पर गठन किया गया है। आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक और राजनीतिक के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं, जैसे- बाल मज़दूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकार आदि।

छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोगः- भारतीय संसद द्वारा पारित मानव अधिकार संरक्षण
अधिनियमए 1993 के अंतर्गत 16 अप्रेल 2001 को छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग का
गठन किया गया हैए जिसका मुख्यालय रायपुर में स्थित है। आयोग को मुख्यतः मानव अधिकारों के
संरक्षणए प्रशासन व्यवस्था में सुधार आदि की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीड़ित व्यक्ति आयोग के
माध्यम से अपने अधिकारों का संरक्षण कर सकता है।
• आयोग में आवेदन की प्रकियाः पीड़ित व्यक्ति निःशुल्क आवेदनए आयोग को संबोधित करते
हिए अपना हस्ताक्षर एवं पूर्ण पता लिखकर प्रेषित कर सकता है। आवेदक व्यक्तिगत रूप से
उपस्थित होकरए डाक द्वारा अथवा इलेक्ट्रांनिक माध्यम से भी भेजा जा सकता है।
• आयोग में आवेदन की सीमाएः सामान्यतः एक वर्ष से अधिक पुरानी घटनाए न्यायालय में
लंबित प्रकरणोंए अस्पष्ट व ओछी शिकायत एवं आयोग के क्षेत्राधिकार के बाहर की शिकायतों पर
विचार नही किया जाता है।
• आयोग के कार्य एवं गतिविधियॉं सामान्य प्रकरणए जिन पर आयोग द्वारा सुनवायई की
जाती हैः शासकीय सेवक द्वारा मानव अधिकार के हनन , पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु से संबंधित,
जेल अभिरक्षा में मृत्यु से संबंधित, पुलिस व जेल अभिरक्षा में बलात्कार से संबंधित, पुलिस
प्रताड़ना की शिकायत से संबंधित, पुलिस द्वारा कार्यवाही न करने से संबंधित, अवैध रूप से
रोके जाने से संबंधित, रैगिंग से संबंधित, नक्सलवादी घटनाओं की शिकायत से संबंधित, टोनही प्रताड़ना से संबंधित, बच्चों को प्रताड़ित करने से संबंधित, बाल विवाह से संबंधित, मानव अधिकारों के हनन से संबंधित प्रकरणों में स्वास्थए शिक्षाए प्रदूषणए राजस्वए वन एवं शासन के अन्य विभागों से प्रतिवेदन आहुत करना एवं आवश्यक अनुशंसा तथा निर्देश जारी करना, मानव का अवैध व्यापार, ट्रैफिकिंगद्ध से संबंधित, शैक्षणिक संस्थाओं में मानव अधिकार हनन के प्रकरण, मानव अधिकारों से संबंधित अन्य शिकायतें।
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राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC- National Human Rights Commission)
पताः मानव अधिकार भवन, ब्लॉक-सी, जी.पी.ओ. कम्प्लेक्स, आई.एन.ए., नई दिल्ली – 110023
शिकायतों के लिए : फोन नं. 24651330, 24663333 फैक्स नं. 24651332 ई-मेल : cr[dot]nhrc[at]nic[dot]in
covdnhrc[at]nic[dot]in (समन्वय ) , dydir[dot]media[dot]nhrc[at]nic[dot]in (मीडिया और संचार), फैक्स नं. 24651329

Online Complaint Registration Link
Search Status of a Complaint Filed in NHRC – दर्ज कराई गई शिकायत की स्थिति की जांच
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छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग (CGSHRC-Chhattisgarh State Human Rights Commission)
पताः पुराने मंत्रालय डी के एस भवन के पीछे, रायपुर, छत्तीसगढ़ (पिन-492001)
फोन एवं फैक्स नंबरः 0771-2235591/92/93/94

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** Human Rights Act, 1993 (with Amendment Act, 2006) [ English ] pdf (185 KB)
*** मानव अधिकार अधिनियम, 1993 (संशोधन अधिनियम, 2006 सहित) [ हिंदी ] pdf (1.72 MB)
NHRC (Procedure) Amendment Regulations, 1997
## राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (प्रक्रिया) संशोधन विनियम, 1997 pdf (773 KB) (Amendment of the Regulations is under active consideration) (इस विनियम का संशोधन विचाराधीन है)


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