क्षेत्र में खेलकूद को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यहाँ एक करोड़ की लागत से आठ साल पहले स्टेडियम का निर्माण तो कर दिया गया लेकिन कभी खेलकूद प्रतियोगिता नहीं हुई। इतना ही नहीं यहाँ कभी कभार राजनितिक या फिर अन्य आयोजन जरूर होते हैं ।बड़े नेताओ के हेलीकाप्टर भी यहाँ उतरता है ।

सुनसान स्टेडियम, खिलाड़ियों में खौफ, शराब और शबाब, संवेदनहीन शासन!

सुनसान स्टेडियम,  खिलाड़ियों में खौफ,  शराब  और शबाब,  संवेदनहीन शासन!

रायपुर (धरसींवा), 22 सितंबर 2019 ।  रायपुर जिले में खेल मैदान की दुदर्शा और खिलाड़यों की सुविधाओं के प्रति प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा के एक मामले से आप समझ सकते है कि प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों के प्रति शासन का क्या दृष्टिकोण हो सकता है। रायपुर जिले के धरसींवा में खेलकूद को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यहाँ एक करोड़ की लागत से आठ साल पहले स्टेडियम का निर्माण तो कर दिया गया लेकिन यहां कभी खेलकूद प्रतियोगिता नहीं हुई। इतना ही नहीं यहाँ कभी कभार राजनितिक या फिर अन्य आयोजन जरूर होते हैं ।बड़े नेताओ के हेलीकाप्टर भी यहाँ उतरता है । लेकिन यह मैदान खेलने लायक नहीं है । हालत यह है कि  इस स्टेडियम में शराबियों का कब्ज़ा हो चूका है ।अंधेरा हो जाने के बाद लोग स्टेडियम कि ओर जाने से डरते है और कानून व्यवस्था बेहाल है, क्योंकि यहां असामाजिक तत्वों का डेरा रहता है ।

राजधानी रायपुर से लगे इस स्टेडियम का नाम इंद्रप्रस्थ जरूर रखा गया है लेकिन यह केवल नाम का ही इंद्रप्रस्थ है । धरसींवा पंचायत की सात एकड़ जमीन पर एक करोड़ से ज्यादा खर्च करने के बाद भी एक बार भी प्रतियोजित आयोजन करने में सफलता नहीं मिली है ।इसकी बदहाली और उपेक्षा का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि गेट के ऊपर नाम तक लिखा नहीं जा सका है। यहां पीने का पानी का कोई इंतजाम नहीं है और न ही शौचालय है।  प्रकाश का इंतजा सूरजे के भरोसे है क्योंकि यहां बिजली की भी कोई व्यवस्था नहीं है । अंधेरा होते ही पूरा का पूरा स्टेडियम अंधेरा में डूबा रहता है और सिर्फ शराबियों और असमाजिक तत्वों के मोबाइल की लाइट टिमटिमाती हुए देखी जा सकती है । यहां का जनपद और ग्राम पंचायत खेल को लेकर कितना गंभीर है इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्टेडियम के लिए बिजली कनेक्शन ही नहीं लिया गया है । चूँकि बिजली नहीं है इसलिए ट्यूबवेल भी नहीं लगाया गया है ।

स्टेडियम बनने से पहले का पुराना टायलेट है तो  है लेकिन वहां पानी ही नहीं है । बारिश में तो हाल और भी बुरा रहता हैं और यहां बरसात का पानी मैदान में भरा रहता है और जमीन कहलाने लायक नहीं रह गई है । स्टेडियम के भीतर निर्माण खंडहर में तब्दील होते जा रहे है । रोशनी नहीं होने के कारण रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है । पुलिस कि गश्त या नाइट पेट्रोलिंग भी स्टेडियम  क्षेत्र में नहीं होती जिससे शराबियों और असमाजिक तत्वों का हौसला बुलंद है  और खिलाड़ी दूर-दूर नजर नहीं आते और महिनों से यहां खेल अधिकारी झांके तक नहीं हैं। 


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