11 सूत्रीय मांगों पर विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ में वन कर्मचारियों की पिछले 2 वर्षों में दो बार समिति का गठन किया गया लेकिन उक्त समिति को दोनों बार अवैध करार दे दिया गया। नियमानुसार सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग से इस समिति के गठन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी । अब नए सिरे से समिति का गठन किया जायेगा , जिसका आदेश हो गया है ।

रायपुर ।  11 सूत्रीय मांगों पर विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ में वन कर्मचारियों की पिछले 2 वर्षों में दो बार समिति का गठन किया गया लेकिन उक्त समिति को दोनों बार अवैध करार दे दिया गया। नियमानुसार सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग से इस समिति के गठन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी । अब नए सिरे से समिति का गठन किया जायेगा , जिसका आदेश हो गया है ।

 छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वेतन विसंगति,वेतनमान  में वृद्धि,विभागीय सेटअप पुनरीक्षण,पुरानी पेंशन योजना करने सहित 11 मांगों को लेकर दो साल पहले राज्य शासन को ज्ञापन सौंपा था। उक्त मांगों पर विचार कर अभिमत देने के लिए पहली बार4 अप्रैल 2018 को तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक समिति ने ६ माह के भीतर अपना अभिमत दे दिया था, लेकिन १३ मार्च २०१९ को इसी मामले में एक और तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया।इस समिति ने १३ मई २०१९ को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी।रिपोर्ट पेश होने के बाद पता चला कि समिति का गठन करने के लिए सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभाग की सहमति नहीं ली गई थी।नतीजन समिति अवैध करार दे दी गई है।नए सिरे से समिति का गठन करने के लिए सामान्य प्रशासन व् वित्त विभाग से सहमति मांगी गई है।


You may also like

Facebook Conversations