छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार के सत्तारूढ़ होने के 9 महीने बाद भी एक भी आदिवासी की रिहाई न होने से आदिवासियों का सब्र खत्म हो रहा है। बता दें कि नक्सलियों से जुड़े मामलों में जेलों में बंद कथित निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का मामला अब सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।

 जगदलपुर दंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ में  भूपेश बघेल सरकार के सत्तारूढ़ होने के 9 महीने बाद भी एक भी आदिवासी की रिहाई न होने से आदिवासियों का सब्र खत्म हो रहा है। बता दें कि नक्सलियों से जुड़े मामलों में जेलों में बंद कथित निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का मामला अब सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। 

आदिवासी लामबंद होकर जगह -जगह प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे है। वहीं पुलिस को संदेह है कि इस मामले के पीछे नक्सलियों की साजिश है।  दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव का कहना है कि पालनार में ज्यादा ग्रामीण नहीं है। पर जो भी ग्रामीण आये थे वे नक्सलियों के दबाव में अंदरूनी इलाको से कई किमी पैदल चलकर यहाँ तक पहुंचे थे। 

आदिवासियों के रिहाई को लेकर चल रहे आंदोलन की कमान पहले पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के हाथ में थी। अब आंदोलन की अगुवाई सोनी सोरी कर रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ता भी विचारधीन बंदियों की रिहाई के लिए प्रयासरत हैं पर पूर्व में सक्रीय कई नेता अब इस मुहीम से कटे नजर आ रहे है। एक आदिवासी नेता ने बताया कि  इस मामले को लेकर राजनीति हो रही है।  भाजपा -कांग्रेस दोनों की मंशा संदिग्ध है। 


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