छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसा भी है जहां विजयदशमी के दूसरे दिन रावण का वध किया जाता है;
बिल्कुल अलग तरीके से यहां रावण का दहन किया जाता है;
रावण को तालाब के बीचो-बीच एक नाव के सहारे लेकर जाया जाता है. फिर बड़े ही हाईटैक तरीके से उसे जलाया जाता है. कहा जाता है

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसा भी है जहां विजयदशमी   के दूसरे दिन रावण का वध किया जाता है। और तो और बिल्कुल की अलग तरीके से यहां रावण का दहन किया जाता है। बकायता रावण  को तालाब के बीचो-बीच एक नाव के सहारे लेकर जाया जाता है।  फिर बड़े ही हाईटैक तरीके से उसे जलाया जाता है। कहा जाता है कि लोग सालों से ये परंपरा निभाते आ रहे हैं. इस पीछे एक बड़ी वजह भी है। 

करीब 12 सालों से रावण दहन का यह सिलसिला बेमेतरा जिले से करीब 20 किलो मीटर दूर ग्राम रेंजावार में हो रहा है। गांव वालों के अनुसार यहां गांव में लोगों की तालाब में डूबने और आकाल मौत की गई घटनाएं हुईं थी। जिसके बाद से यह परंपरा चालू हुई। यहां तालाब के बीचों बीच ग्रामीण 30 फीट का रावण बनाते हैं। इसे बकायदा पानी में डूबने से बचने के लिए 12 लकड़ी की पटिया में 8 ड्रम को बांधकर तैयार किया जाता है। इसे बनाने में करीब 1 हफ्ते का समय लगता है।  रावण के पुतले को इसे के सहारे तालाब के बीचो-बीच लेकर गांव वाले जाते हैं।  फिर इसे बकायदा रिमोट कंट्रोल से जलाया जाता है. इस अनोखी प्रथा के कारण आस-पास के गावों में लेजवारा गांव की चर्चा काफी होती है।


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