बरगद के विशालकाय वृक्ष को नईदिल्ली से यहाँ पहुंची टीम ने पहले केमिकल से ट्रीट किया ओर फिर इस बरगद को धरमपुरा से हाटकचोरा में ले जाकर वापस प्लांट किया।शहर में हुए इस पहले प्रयोग के बाद पर्यावरण प्रेमी यह अपेक्षा कर रहे है कि अब पुराने पेड़ों की कटाई के बाद उन्हें रीप्लान्ट करने की प्रक्रिया प्रशासन भी अपनाएगा।

जगदलपुर। बरगद के विशालकाय वृक्ष को नईदिल्ली से यहाँ पहुंची टीम ने पहले केमिकल से ट्रीट किया ओर फिर इस बरगद को धरमपुरा से हाटकचोरा में ले जाकर वापस प्लांट किया।शहर में हुए इस पहले प्रयोग के बाद पर्यावरण  प्रेमी यह अपेक्षा कर रहे है कि  अब पुराने पेड़ों की कटाई के बाद उन्हें रीप्लान्ट करने की प्रक्रिया प्रशासन भी अपनाएगा।

दलपत सागर वार्ड के पार्षद नरसिंह  राव ने बताया कि गायत्री मंदिर के बगल में युवा व्यवसायी चन्दन -बंधन दास का निजी प्लाट है, जहाँ निर्माण प्रस्तावित है।इस जमीन पर 30 साल पहले रोपा गया बरगद का वृक्ष था। चूंकि इस वृक्ष से परिवार के लोगों का भावनात्मक ओर धार्मिक लगाव था।लिहाजा सभी ने मिलकर यह तय किया कि इसे काटने के बजाय बतौर प्रयोग इसे किसी दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जाए। नईदिल्ली की टीम से संपर्क साध कर जब इस बारे में बात की गई तब पता चला कि थोड़े खर्च में ही इस बहुमूल्य वृक्ष को नया जीवन दिया जा सकता है। सभी ने मिलकर यह तय किया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर ही वे अपने प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे।दिल्ली से आई टीम के सदस्यों ने पहले पेड़ की जड़ पर केमिकल से ट्रीटमेंट किया और फिर उसे मशीनों की सहायता से उखाड़ा गया।


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