रामनवमी के शुभ अवसर पर शुरु हुई हमारी छत्तीसगढ़ आवाज की Helpline;
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कोविड 19 से छत्तीसगढ़ में मचे हाहाकार के बीच, हेल्पलाइन के माध्यम से लोगों को मदद पहुंचाने की एक कोशिश

कोविड 19 से छत्तीसगढ़ में मचे हाहाकार के बीच, हेल्पलाइन के माध्यम से लोगों को मदद पहुंचाने की एक कोशिश

संपादकीयः संपादकीयः हेल्पलाइन @ कोविड 19 छत्तीसगढ़ः- ऐसा लग रहा है कि मानों युद्ध के मैदान में हैं, लेकिन लेकिन फिर भी मातारानी और भोले बाबा पर पूरा भरोसा है

ब्यूरो रिपोर्ट, 24 अप्रैल 2021। रामनवमी के शुभ अवसर पर शुरु हुई हमारी छत्तीसगढ़ आवाज की Helpline / हेल्पलाइन सहायता को आज 04 दिन हो रहे हैं...महामृत्युंजय जप तो बचपन से सुनते और पढ़ते आ रहें है, लेकिन उसका यथार्थ दर्शन अब दिख और समझ रहा है...""हे त्रिकालदर्शी ... दुनिया से हमारे संबंधो को काट कर, मौत के भय से मुक्ति दिलाते हुए हमें मोक्ष की ओर ले जाइये ""। अगर हर शख्स इस मंत्र की राह पर चले, तो वह किसी भी मुश्किल वक्त को आसानी से पार कर सकता है। ....फिलहाल ...लाशों के बीच, जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे है । जंग के मैदान में समान्यतः फौजी अपने साथी और वर्दी को पहचानते हुए उसकी जान बचाने की कोशिश करता है। लेकिन कोरोना कि यह जंग में सिर्फ इंसानियत ही वर्दी है।..

हमारी Helpline में वेबसाइट & फोन के माध्यम से मेरी जिंदगी के 42 सालों में पहली बार चंद लम्हों पहले संपर्क में आया कोई शख्स, कब कॉलर/ पीड़ित से परिवार का सदस्य जैसा लगने लगता है पता ही नहीं चलता। उस शख्स / या मरीज को सहायता देने और बचाने के लिए हम यथासंभव कोशिश कर रहे हैं। जान तो खैर ऊपरवाला ही बचाता है, लेकिन जब कॉलर या कोरोना मरीज को सही समय पर सही इलाज या सहायता मिल जाती है, तो बेहद सुकून मिलता है, लगता है कि जंग के मैदान के एक पड़ाव में फतह मिली है। लेकिन वहीं, जब घंटों तक, कई बार रात भर उस मरीज को बचाने की कोशिश करने के बाद भी, जब यह सुनने को मिलता है कि वह शांत हो गया (Sir My Father/Mother/ Brother/Sister is no more..), तब न सिर्फ आंसू छलक पड़ते है, बल्कि ऐसा लगता है कि कोई हमारा अपना / घर का व्यक्ति मौत के आगोश में समा गया। और तब हताशा एक जिंदगी को बचाने में असफल होने की रहती है।

आज छत्तीसगढ़ आवाज की Helpline चलाते हुए तो करीब 04-05 साल हो रहा है, लेकिन इसके पहले पीड़ितों के साथ कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई में उसकी आवाज को अंजाम तक पहुंचाने में काफी समय मिलता था। कई बार सफलता हाथ नहीं लगी है। लेकिन इस बार, कोरोना हेल्पलाइन में कुछ मिनट या कुछ घंटे का ही समय मिल रहा है। नहीं मालूम ऊपर वाला किस मकसद से यह वक्त दिखा रहा है, क्या सीखा रहा है? फिलहाल बेहद ही सीमित संसाधनों में काम करते हुए करीब 110 कॉलर / कोविड 19 मरीजों से Help Line के माध्यम से संपर्क में आने के बाद एक बात तो तय है कि उनकी Help हम कितनी कर पाये या नहीं कर पाये इसका अंदाज नहीं लगा सकते। लेकिन ऊपरवाले ने हमारी LINE जरुर जोड़ दी है। कोरोना के कारण मचे हाहाकार में बहुत से लोग व्यक्तिगत तौर पर और कुछ सामुहिक तौर पर जिंदगी बचाने की इस जंग में अपनी अपनी भूमिका निभा रहे हैं और बिना थके लगे हुए है।... बहरहाल, मातारानी और 'कालो के काल '' पर भरोसा और उम्मीद है कि अंत भला होगा और उसने यह वक्त और परिस्थिति बहुत कुछ सीखाने के लिये रचा है.... Picture अभी बाकी है...

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प्रबंध संपादक, छत्तीसगढ़ आवाज


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